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शेयर प्राइस टारगेटSel Manufacturing Share Price Target

SEL Manufacturing Share Price Target 2026 से 2030: पहले यह पढ़ें

SEL Manufacturing शेयर प्राइस टारगेट देखने से पहले जानें: कंपनी दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) में है, फैक्ट्री बंद है और नेट वर्थ ऋणात्मक है.

6 मिनट·Rahul Kumar·
SEL Manufacturing Share Price Target 2026 से 2030: पहले यह पढ़ें
प्राइस चार्ट: SEL ManufacturingBSE · TradingView

ऊपर का चार्ट TradingView (BSE) से आता है और रोज़ मार्केट बंद होने के बाद अपडेट होता है. नीचे दिए गए टारगेट सिर्फ शिक्षा के लिए हैं.

SEL Manufacturing Share Price Target: इस लेख की शुरुआत एक जरूरी चेतावनी से करनी पड़ेगी, क्योंकि यह जानकारी आपके पैसे से जुड़ी है.

SEL Manufacturing अभी दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) से गुजर रही है. इसकी ज्यादातर फैक्ट्रियां बंद हैं, इसकी नेट वर्थ ऋणात्मक हो चुकी है, और इसके ऑडिटर ने यह शक जताया है कि कंपनी आगे चल पाएगी या नहीं.

ऐसी कंपनी का "प्राइस टारगेट" देना गलत होगा, क्योंकि यहां सवाल यह नहीं है कि शेयर कितना ऊपर जाएगा. सवाल यह है कि शेयर बचेगा भी या नहीं. नीचे पूरी स्थिति साफ-साफ समझाई गई है.

कंपनी की असली हालत (सितंबर 2026)

जानकारीआंकड़ा
शेयर प्राइसकरीब ₹27
मार्केट कैपकरीब ₹90 करोड़
52 हफ्ते का हाई₹43.36
52 हफ्ते का लो₹26.33
FY26 की कुल बिक्री₹15.43 करोड़
FY26 का शुद्ध घाटा₹167.87 करोड़
नेट वर्थऋणात्मक ₹399.58 करोड़
कानूनी स्थितिCIRP (दिवालिया प्रक्रिया) में

इन आंकड़ों को एक साथ पढ़िए. पूरे साल में कंपनी ने सिर्फ ₹15.43 करोड़ का सामान बेचा, और घाटा ₹167.87 करोड़ का हुआ. यानी घाटा बिक्री से 10 गुना से भी ज्यादा है.

FY25 में बिक्री ₹32.87 करोड़ थी, यानी एक साल में बिक्री आधी से भी कम रह गई. वजह साफ है: फैक्ट्रियां ज्यादातर बंद पड़ी हैं और जो थोड़ी बहुत कमाई हो रही है वह दूसरों का काम (जॉब वर्क) करके हो रही है.

ऑडिटर ने क्या कहा

कंपनी के ऑडिटर ने दो गंभीर बातें कही हैं:

  1. Qualified Opinion दिया, यानी उन्हें कंपनी के हिसाब-किताब के कुछ हिस्सों पर पूरी स्पष्टता नहीं है
  2. Going Concern पर संदेह जताया, यानी इस बात पर अनिश्चितता है कि कंपनी आगे चल भी पाएगी या नहीं

ऑडिटर के मुताबिक कंपनी की संपत्तियों की किताबी कीमत उनकी असली कीमत से ज्यादा हो सकती है.

CIRP का मतलब क्या है

यह हिस्सा सबसे जरूरी है, खासकर उनके लिए जो सोचते हैं कि सस्ता शेयर खरीद लें.

जब कोई कंपनी अपना कर्ज नहीं चुका पाती, तो लेनदार उसे NCLT में ले जाते हैं और दिवालिया प्रक्रिया शुरू होती है. इस प्रक्रिया में कंपनी को खरीदने के लिए कोई नया मालिक ढूंढा जाता है.

पैसा वापस मिलने का क्रम कानून में तय है:

क्रमकिसे पहले पैसा मिलता है
1प्रक्रिया का खर्च और कर्मचारी
2बैंक और सुरक्षित लेनदार
3बाकी लेनदार
4शेयरधारक (सबसे आखिर में)

आम शेयरधारक सबसे आखिरी नंबर पर आता है. भारत में कई ऐसे मामले हुए हैं जहां दिवालिया प्रक्रिया के बाद पुराने शेयर लगभग शून्य कर दिए गए या शेयर बाजार से हटा दिए गए, और छोटे निवेशकों को कुछ नहीं मिला.

यह डराने के लिए नहीं लिखा गया, यह कानून का सीधा नियम है जो हर निवेशक को पता होना चाहिए.

तो फिर शेयर का भाव ₹27 क्यों है

अच्छा सवाल. इसकी वजह कंपनी की कमाई नहीं है, बल्कि दो चीजें हैं:

  1. बहुत कम शेयर बाजार में उपलब्ध हैं. रोज का कारोबार कुछ हजार शेयर का ही होता है, इसलिए छोटी सी खरीद से भी भाव हिल जाता है.
  2. लोग उम्मीद पर खरीदते हैं कि कोई बड़ी कंपनी इसे खरीद लेगी और शेयर उछल जाएगा.

लेकिन ध्यान दीजिए: भाव ₹27 है और कंपनी की कुल बाजार कीमत सिर्फ ₹90 करोड़ के आसपास है, जबकि उसकी नेट वर्थ ऋणात्मक ₹399 करोड़ है. यानी बाजार भी मान रहा है कि कंपनी की कोई खास कीमत नहीं बची.

SEL Manufacturing Share Price Target 2026 से 2030

यहां मैं वह नहीं करूंगा जो बाकी वेबसाइट करती हैं. CIRP में चल रही कंपनी के लिए साल दर साल टारगेट देना गलत होगा, क्योंकि उसका आधार ही कोई नहीं है. कंपनी की कमाई नहीं है, संपत्ति ऋणात्मक है, और मामला अदालत में है.

इसकी जगह यह समझिए कि आगे तीन में से एक रास्ता बन सकता है:

आगे क्या हो सकता हैशेयरधारक पर असर
कोई नया खरीदार आए और रिजॉल्यूशन प्लान मंजूर होपुराने शेयर बहुत कम कीमत पर बदले जा सकते हैं या लगभग खत्म हो सकते हैं
कंपनी बंद कर दी जाए (लिक्विडेशन)शेयरधारकों को आमतौर पर कुछ नहीं मिलता
कंपनी दोबारा चल पड़े और मुनाफा कमाएतभी शेयर में असली तेजी मुमकिन है, पर यह सबसे मुश्किल रास्ता है

पहले दो रास्तों की संभावना तीसरे से कहीं ज्यादा रहती है. यही सच्चाई है.

क्या करना चाहिए

अगर आपके पास यह शेयर पहले से है, तो कंपनी की NCLT से जुड़ी घोषणाएं और रिजॉल्यूशन प्लान की खबरें ध्यान से देखते रहिए. ये सूचनाएं कंपनी BSE और NSE पर देती है.

अगर आप नया खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक बात याद रखिए: सस्ता भाव और सस्ती कंपनी दो अलग चीजें हैं. ₹27 का यह शेयर ₹2,000 के किसी मुनाफा कमाने वाले शेयर से कहीं ज्यादा महंगा साबित हो सकता है.

शेयर बाजार में नए हैं तो पहले यह पढ़िए: सबसे सुरक्षित शेयर कौन से हैं.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

SEL Manufacturing 2030 में कितना जा सकता है?

कंपनी अभी दिवालिया प्रक्रिया में है, इसलिए 2030 का कोई भरोसेमंद टारगेट देना मुमकिन नहीं है. पहले यह तय होना है कि कंपनी बचेगी या नहीं.

क्या SEL Manufacturing बंद हो गई है?

कंपनी की ज्यादातर फैक्ट्रियां बंद हैं और वह CIRP से गुजर रही है. कानूनी तौर पर कंपनी खत्म नहीं हुई है, पर कामकाज लगभग ठप है.

क्या दिवालिया कंपनी के शेयरधारकों को पैसा मिलता है?

आमतौर पर नहीं. कानून में शेयरधारक सबसे आखिर में आते हैं. बैंक और लेनदारों को चुकाने के बाद ही कुछ बचे तो मिलता है, और ज्यादातर मामलों में कुछ नहीं बचता.

क्या यह शेयर खरीदना चाहिए?

यह बेहद ऊंचे जोखिम वाला मामला है, जहां पूरा पैसा डूबने की असली संभावना है. यह लेख निवेश सलाह नहीं है. ऐसा कोई भी फैसला अपने वित्तीय सलाहकार से बात करने के बाद ही लें.

कंपनी की नेट वर्थ ऋणात्मक होने का क्या मतलब है?

इसका मतलब है कि कंपनी पर जितना कर्ज और देनदारी है, वह उसकी कुल संपत्ति से करीब ₹399 करोड़ ज्यादा है.


यह लेख सिर्फ सीखने के लिए है. हम SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर नहीं हैं और यह निवेश सलाह नहीं है. सभी आंकड़े सितंबर 2026 तक के हैं. पैसा लगाने से पहले खुद जांच करें और कंपनी की आधिकारिक घोषणाएं देखें.

— Rahul, TradingWithRahul
Rahul Kumar

लेखक

Rahul Kumar

B.Com, Delhi University से कॉमर्स ग्रेजुएट. 2020 से शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और निवेश कर रहे हैं और यहाँ अपना अनुभव आसान हिंदी में लिखते हैं.